उत्तराखंड में PPS से IPS में प्रमोशन होगा जल्द, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिक्त पद पर दी सहमति – Wadia News

उत्तराखंड में PPS से IPS में प्रमोशन होगा जल्द, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिक्त पद पर दी सहमति


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड में स्टेट पुलिस सर्विस से भारतीय पुलिस सेवा कैडर में प्रमोशन को लेकर सहमति दी है. इस तरह उत्तराखंड में राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को भारतीय पुलिस सेवा कैडर में प्रमोट होने का मौका मिलने जा रहा है. साल 2005 बैच के अभी कई PPC अफसर IPS में प्रमोट होने का इंतजार कर रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव उत्तराखंड और यूपीएससी को पत्र के माध्यम से राज्य में आईपीएस कैडर पर एक पद रिक्ति को लेकर सहमति दी है. MHA ने राज्य में एक पद पर रिक्ति के सापेक्ष स्टेट पुलिस सर्विस के अधिकारी को आईपीएस कैडर में प्रमोट करने की कार्रवाई को बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है. इसको लेकर उत्तराखंड सरकार ने इसी महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड को लिखे पत्र में बताया है कि 1 जनवरी 2025 तक उत्तराखंड कैडर के आईपीएस का अधिकृत पदोन्नति कोटा 23 है, जिसमें से 22 अधिकारी पहले से ही पद पर बने हुए हैं. ऐसे में कुल पदोन्नति कोटा में एक पद खाली है. IPS कैडर में पदोन्नति को लेकर ये रिक्ति IPS सुखबीर सिंह के 2024 में सेवानिवृत होने के बाद बनी है. PPS से IPS में पदोन्नति को लेकर साल 2005 के अधिकारी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. फिलहाल सीनियरिटी के आधार पर 2005 बैच के पीपीएस अधिकारी सुरजीत सिंह पंवार को इस पदोन्नति में लाभ मिलने की उम्मीद है.

खास बात यह है कि साल 2005 के पीपीएस अधिकारियों के बैच में अजय सिंह और पंकज भट्ट साल 2014 में ही आईपीएस रैंक पर पदोन्नत हो चुके हैं. जबकि अभी 2005 बैच के चार अधिकारी आईपीएस रैंक पाने का इंतजार कर रहे हैं. खास बात यह है कि आईपीएस रैंक में रिक्ति न होने के कारण एक ही बैच के अधिकारियों को कई सालों के अंतराल में प्रमोशन का लाभ मिल पा रहा है.

साल 2005 का पीपीएस अधिकारियों का बैच बड़ा होने और इसके सापेक्ष आईपीएस रैंक में रिक्ति न होने के चलते सभी अधिकारियों को प्रमोशन नहीं मिल पाया था. मौजूदा स्थिति को देखें तो 2005 के ही सभी अधिकारियों को आईपीएस में प्रमोट होने के लिए 2027 तक का इंतजार करना पड़ेगा. इन्हीं स्थितियों को देखते हुए अब PPS पर अधियाचन के दौरान विशेष रूप से विचार किया जा रहा है और अब कम संख्या में अधियाचन भेजने की कोशिश हो रही है.








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