चमोली ब्यूरो – चुनावी वर्ष में वर्तमान सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र भराड़ीसैंण में हुआ। दो दिन के सत्र में विपक्ष ने भी मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी। पहला दिन दिवंगत विधायकों के शोक संवेदना में बीत गया। दूसरे दिन सदन में प्रश्नकाल भी विपक्ष के हंगामे से चल नहीं पाया। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण की भराड़ीसैंण की वादियों में दिन के समय चटक धूप और शाम को कड़ाके की ठंड में सियासी माहौल तो गरमाया लेकिन जन मुद्दों को धार नहीं मिल पाई। विपक्ष सदन में सरकार को घेरने के लिए बेकार दिखा। हंगामे से विपक्ष को तरकश में सजे मुद्दों के बाण चलाने का मौका नहीं मिला। दो दिन का सत्र डेढ़ दिन ही चल पाया है। सदन की कार्यवाही कुल आठ घंटे चार मिनट चली। चुनावी वर्ष में वर्तमान सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र भराड़ीसैंण में हुआ। दो दिन के सत्र में विपक्ष ने भी मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी। पहला दिन दिवंगत विधायकों के शोक संवेदना में बीत गया। दूसरे दिन सदन में प्रश्नकाल भी विपक्ष के हंगामे से चल नहीं पाया। यह पहला मौका है जब सदन में जन मुद्दों की गूंज नहीं सुनाई दी।